Wednesday, April 13, 2011

~~~...बस की नहीं...~~~

पोशाक पर पोशाक, परत पर परत चढ़ी हुई हैं;
तेरे दिल तक पहुंचना बस की नहीं, दूर है बहुत |



किताब हो तुम जिसके पन्ने पलटते उम्र गुज़री है,
अभी तो आधे रास्ते तक भी नहीं पहुँच पायी हूँ |

पुरानी किताबों में खुशबुयें सी होती हैं वक़्त की,
पुराने पत्ते, फूल भी कभी; मुझे कुछ नहीं मिला |

कहने को बाहों में थामा जाने कितनी बार, पर,
चमकती आँखों के राज़ अभी तलक लापता से हैं |

काग़ज़ों के पुर्जों में छुपाया है सारे वादों को मैंने,
खुद को पढ़वाती रहती हूँ, ताकि यकीं बना रहे |


आजकल 'नूर' की मांग शायद ग्राहकों में बढ़ी है,
'विती' हक़ रखती ज़रूर है, मगर जताती नहीं |

7 comments:

  1. Holy one!!Loved few lines & I'm copying this to myself. *salutes*

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  2. Wow loved it :-)

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  3. Its amazing stuff lady...:)....too good..take a bow :)

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  4. you are always absolute amazing with hindi lines !! awesome !! totally !!

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  5. You've a thing for old memories, times and keepsakes, dont you?
    Another gem. :)

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