Thursday, October 7, 2010

~~~...आओ...~~~

ज़बरदस्ती तो नहीं है, ना आना चाहो ना आओ,
रुला तो दिया है, अब जाना तुम्हें हो, चले जाओ...


कुछ जुड़ता सा नहीं, सब टूटा लगे है आज यहाँ
गर तलाश पूरे की है, इस गली को भूल जाओ...


आशियाना नया बनेगा जब, न्योता भेजूंगी ज़रूर
छोडो अभी, तब तक के लिए तुम मुझे भूल जाओ...


थक गए कुतर-कुतर के तारें फ़ोन की पंछी, बन्दर
वाह! बात ना करने का यह बहाना बढ़िया, जाओ...


तब बात चलती थी 'नूर' की, अब भी हाल वही है
पर 'विती' की छुप्पी के चर्चे हैं जारी अभी, जाओ...

9 comments:

  1. :D nice one ..a different mood than the usual!1

    ReplyDelete
  2. It seems as if you are angry on someone :).. very poised , and well expressed ...

    ReplyDelete
  3. hmmm
    aching with a soft pain... :)

    ReplyDelete
  4. थक गए कुतर-कुतर के तारें फ़ोन की पंछी, बन्दर
    वाह! बात ना करने का यह बहाना बढ़िया, जाओ...

    :D Nice!

    ReplyDelete
  5. जबरदस्ती तो न थी, फिर भी आयें हैं हम....
    खूबसूरत! :)

    ReplyDelete
  6. कुछ जुड़ता सा नहीं, सब टूटा लगे है आज यहाँ
    गर तलाश पूरे की है, इस गली को भूल जाओ..

    Beautiful :)

    ReplyDelete
  7. "थक गए कुतर-कुतर के तारें फ़ोन की पंछी, बन्दर
    वाह! बात ना करने का यह बहाना बढ़िया, जाओ..."

    saadgi mein ek ankahi baat keh di...
    jee karta tha unse ye kahu, magar kya pata tha is qadar aasan bhi yeh baat ban sakti thi..

    hey 'bavri viti', i m followin ur blogs since a few months now. wished to compliment u for the lines u pen down.. after long found someone who is interested in hindi n urdu media of expression..
    love the way u express..
    keep it up.. god bless..
    :)

    ReplyDelete
  8. thank you everyone :)

    @veena: you share your name with someone very close to me. i was a little shaken for a second :) thanks a lot for the comment and for following the blog! i am glad you like the poems. please keep reading and giving me feedback!

    ReplyDelete